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Saturday, December 20, 2008

नहाती हुई लड़की

लड़की नहाती है
तो उसके पोर -पोर मे समां जाते हैं
असंख्य जल -बिन्दु ,
तब वह सवथा ही मुक्त हो जाती है
गुरुत्वाकर्षण से
और चल देती है
हजारों प्रकाश वर्ष की अनंत यात्रा पर

लड़की नहाती है
तो वातावरण गुंजायमान हो उठता है
एक ऐसे आदि -गीत से
जिसमे शब्द अक्षरों से नहीं
प्रकट होते हैं चित्र बनकर ,
तब उभर आती है
एक काठ की नौका
जिसमे बैठकर
वह तिरती चली जाती है
आकाश की अथाह गहराइयों मे

लड़की नहाती है
तो उसकी देह से निकल कर
एक रहस्मय गमक
व्याप्त हो जाती है
समस्त सृष्टि मे
तब वह समय की
स्थापित परिबषाओं के
पार निकल जाती है

लड़की नहाती है
तो यह प्रक्रिया चलती है -
अनवरत
घंटों ,दिनों ,महीनों ,बरसों ,युगों
नहाकर सदेह वापस लौटते
आज तक
किसी ने किसी लड़की को
युगों -युगों से नहीं देखा .
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