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Friday, May 6, 2011

ओसामाजी के जाने के बाद

ओसामाजी के जाने के बाद
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                       सुबह सवेरे जब मेरे शहर की आधी से अधिक युवा ,अधेड और बुढ़ापे की दहलीज़ पर खड़ी आबादी रोज़ी-रोटी के पुख्ता जुगाड में निकटवर्ती महानगर की ओर लुढकना शुरू कर चुकी थी कि खबर आयी -परम आदरणीय,अत्यंत तेजस्वी ,प्रातः स्मरणीय,वीर शिरोमणि श्री ओसामाजी बिन लादेन ने अपनी नश्वर देह त्याग दी है.मैं बेतरह बेचैन हो उठा कि अब मैं दफ्तर जाऊं या बुद्धू बक्से के सामने बैठ कर ओसामाजी के परलोक गमन का लाइव टेलीकास्ट देखूं.मुझे ताज्जुब था कि ओसामाजी ने  अपने इहलोक प्रस्थान के लिए यह कैसा दिन चुना.उन्हें अपनी नश्वर देह त्यागनी ही थी तो यह काम किसी सार्वजनिक अवकाश के दिन करते ताकि हम उनकी प्रस्थान लीला को पूरे मनोयोग से देख पाते.
                           हम ठहरे सर्वधर्मसमभाव के हामी ,हमारे लिए तो प्रत्येक मजहब और उसके प्रवर्तक पूजनीय हैं.हम तो प्रत्येक जीव जंतु वनस्पति और पाषाण में सरलता से अपने इष्ट के दर्शन कर लेते हैं .हमारी प्रार्थनाओं में में सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त प्रत्येक जड़, चेतन अथवा अचेतन के लिए शांति और सदभाव की कामना समाहित रहती है.हालाँकि संत कबीर ने अनेक शताब्दी पूर्व पत्थर को पूज कर हरि को प्राप्त करने की कार्य प्रणाली पर प्रश्न -चिन्ह लगा दिया था.इसके बावजूद हमने संत कबीर से कोई बैर भाव नहीं रखा.उनकी वाणी से हम प्रेरणा प्राप्त करते रहे लेकिन पत्थर पूजने का काम भी बदस्तूर करते रहे.
                              ओसामाजी के इस असामयिक निधन पर हम सभी मर्माहत हैं.हमारे मन मेंअमरीका के वर्ड ट्रेड सेंटर के हमले में मरे निर्दोषोंके प्रति गहरी संवेदना का भाव है. हम अता मुहम्मद और उसके जांबाज़ साथियों को भी अब तक कहाँ भुला पाए हैं.हम 26/11 के मुंबई हमले में प्राण गवांने वाले मासूमों और सुरक्षाबलों के शहीद जवानों और अधिकारियों की स्मृति में हर साल मोमबत्तियाँ जलाना कब  भूलें हैं भला.आर्थर  रोड जेल में कैद कसाब भी हमारी श्रधा का पात्र है.आखिर वह भी तो जान हथेली पर रख कर खूब लड़ा था.बहादुरों का सम्मान करना हमारी पुरानी रवायत है.हम इतिहास से सबक हांसिल करने में विशवास नहीं करते.हमें तो सेकुलरिज्म की आधार -शिला पर एक ऐसा इतिहास रचना है जिसमें जांबाजों की ग्लोबल शिनाख्त दर्ज होगी.जिसमे शहीद भगत सिंह .अशफाक उल्ला खान ,चंद्रशेखर ,महारानी लक्ष्मी बाई सरीखे देशभक्तों के साथ अफज़ल गुरु और कसाब सरीखे युद्धवीरों का नाम भी  दर्ज होगा .ऐनी बेसेंट  ,राजा राम मोहन राय जैसे समाज सुधारकों के बरक्स तेलगी ,ए.राजा और कलमाड़ी जैसे  नामों का उल्लेख रहेगा.
                                   दिग्गी राजा ने पिछले दिनों जब ओसामाजी की मौत पर दुःख प्रकट किया तो उनकी आवाज़ रुंध गई थी और उनके प्रति आदर भाव से आँखें छलछला आयी थीं .देश और  मजहब से परे उनकी इस सोच को देख अनेक उनके तत्काल मुरीद हो गये.मैं भी देश भक्ति के किसी घिसे -पिटे फार्मेट का कायल नहीं .मेरी और दिग्गी राजा की सोच में कैसा अदभुत  साम्य है .इसीलिए तो कहा जाता है कि दो महान विचारक एक समान सोच रखते हैं.
                                          ओसामाजी, आपके इस धरती से यूं चले जाने पर हम सभी दुखी हैं.प्रत्येक कार्यदिवस में जब विभिन्न प्रकार  की सवारी गाडियां हमें  भूसे के ढेर की मानिंद महानगरों की ओर ढोती हैं तो तब बतरस के जरिये हम आपके सम्मान में पुष्प वर्षा करते हैं .किसी के प्रति श्रधा प्रकट करने का इससे अच्छा तरीका हमें  आता भी नहींI

                                   

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