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Sunday, October 5, 2008

एक छोटी कविता

दुःख
एक अपंग चोर है
ऊँची दीवारों पर
चढ़ नही पाता है
इसलिय अकसर
महलों के बजाय
छप्परों मे घुस जाता है .

6 comments:

dr. ashok priyaranjan said...

nirmaji,
bahut prakhar abhivyakti hai.

sab kuch hanny- hanny said...

chota magar tikha. achachhi lagi

shama said...

"Ek chhotee kavita" aur "Pahunch" donohee bohot khoob!Sankshipt hokebhee kitaa kuchh keh gaye aap!
Badhaee ho!

हरि said...

शानदार कतिव । देखन में छोटन लगे घाव करे गंभीर।

ओमकार चौधरी said...

छोटी, लेकिन बहुत सटीक कविता.
बहुत खूब. गरीबी पर इस से सटीक
और क्या लिखा जा सकता है ?
बधाई.

योगेन्द्र मौदगिल said...

अच्छी रचना के लिये बधाई स्वीकारें